थायरॉइड अल्ट्रासाउंड कैसे होता है? प्रक्रिया, सामान्य परिणाम और रिपोर्ट कैसे पढ़ें

Dr. Nikunj Jain
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थायरॉइड अल्ट्रासाउंड कैसे होता है? प्रक्रिया, सामान्य परिणाम और रिपोर्ट कैसे पढ़ें

थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। यह ऐसे हार्मोन बनाती है जो शरीर के कई जरूरी कामों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। थायरॉइड में सूजन, गांठ या आकार में बदलाव होने पर डॉक्टर थायरॉइड अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे सकते हैं। थायरॉइड अल्ट्रासाउंड एक आसान और सुरक्षित जांच है। इसमें एक्स-रे या किसी तरह की रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता। इस जांच में ध्वनि तरंगों की मदद से थायरॉइड और गर्दन के आसपास के हिस्सों की तस्वीरें बनाई जाती हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के नेतृत्व में थायरॉइड से जुड़ी जांच और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड क्या होता है?

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड एक ऐसी जांच है जिसमें ध्वनि तरंगों की मदद से थायरॉइड ग्रंथि की तस्वीरें बनाई जाती हैं। जांच के दौरान एक छोटा उपकरण, जिसे प्रोब कहा जाता है, गर्दन की त्वचा पर चलाया जाता है। प्रोब से निकलने वाली ध्वनि तरंगें शरीर के अंदर जाकर वापस लौटती हैं। मशीन इन तरंगों को तस्वीरों में बदल देती है। इससे डॉक्टर थायरॉइड का आकार, बनावट और उसमें मौजूद गांठ या दूसरे बदलावों को देख सकते हैं।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड क्यों कराया जाता है?

अगर गर्दन में गांठ महसूस हो, थायरॉइड का आकार बढ़ा हुआ हो या पहले की जांच में कोई बदलाव दिखाई दिया हो, तो डॉक्टर थायरॉइड अल्ट्रासाउंड लिख सकते हैं। इस जांच से थायरॉइड में मौजूद गांठों की संख्या, आकार और बनावट के बारे में जानकारी मिलती है। इससे यह भी देखा जा सकता है कि किसी गांठ में ऐसे लक्षण तो नहीं हैं जिनके कारण आगे की जांच की जरूरत हो। अगर पहले से थायरॉइड में गांठ मौजूद है, तो समय-समय पर अल्ट्रासाउंड करके उसके आकार और बनावट में बदलाव को भी देखा जा सकता है।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया कैसे होती है?

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया बहुत आसान होती है। मरीज को जांच की मेज पर पीठ के बल लिटाया जाता है। गर्दन को थोड़ा पीछे रखने के लिए सिर के नीचे छोटा सहारा दिया जा सकता है। इसके बाद गर्दन की त्वचा पर एक विशेष जेल लगाया जाता है। फिर डॉक्टर या प्रशिक्षित जांचकर्मी प्रोब को गर्दन पर धीरे-धीरे चलाते हैं और थायरॉइड की तस्वीरें लेते हैं। जांच के दौरान प्रोब से गर्दन पर हल्का दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन आमतौर पर इसमें दर्द नहीं होता। इसमें सुई नहीं लगाई जाती और शरीर में कोई दवा या रेडियोधर्मी पदार्थ नहीं दिया जाता।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड से पहले क्या तैयारी करनी होती है?

इस जांच के लिए आमतौर पर किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। सामान्य रूप से मरीज को खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। जांच से पहले गर्दन के आसपास पहने हुए गहने हटा देना अच्छा रहता है। ऐसे कपड़े पहनना भी सुविधाजनक होता है जिनसे गर्दन आसानी से खुल सके। अगर थायरॉइड अल्ट्रासाउंड के साथ कोई दूसरी जांच भी लिखी गई है, तो उस जांच के लिए अलग तैयारी की जरूरत हो सकती है। इसलिए डॉक्टर या जांच केंद्र द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड में क्या देखा जाता है?

अल्ट्रासाउंड के दौरान थायरॉइड के दोनों हिस्सों और बीच के हिस्से, जिसे इस्थमस कहा जाता है, को देखा जाता है। रिपोर्ट में थायरॉइड का आकार और उसकी बनावट के बारे में जानकारी दी जा सकती है। अगर थायरॉइड में कोई गांठ यानी नोड्यूल दिखाई देता है, तो उसकी जगह और आकार दर्ज किए जाते हैं। इसके अलावा गांठ ठोस है या उसमें तरल है, उसकी बनावट कैसी है, किनारे कैसे हैं और उसमें कैल्सिफिकेशन जैसे बदलाव हैं या नहीं, यह भी देखा जा सकता है। इन सभी बातों को एक साथ देखकर डॉक्टर यह तय करते हैं कि गांठ को केवल निगरानी में रखना है या आगे किसी जांच की जरूरत है।

सामान्य थायरॉइड अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में क्या लिखा होता है?

अगर थायरॉइड का आकार और बनावट सामान्य दिखाई देती है और कोई स्पष्ट गांठ नहीं मिलती, तो रिपोर्ट में थायरॉइड को सामान्य बताया जा सकता है। हालांकि, हर जांच केंद्र की रिपोर्ट का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए रिपोर्ट में लिखे शब्दों को केवल इंटरनेट पर देखकर समझने के बजाय डॉक्टर से समझना बेहतर होता है। अगर रिपोर्ट में थायरॉइड नोड्यूल लिखा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज को कैंसर है। थायरॉइड में गांठें काफी सामान्य हैं और उनमें से बहुत-सी गांठें कैंसर वाली नहीं होतीं।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट कैसे पढ़ें?

रिपोर्ट पढ़ते समय सबसे पहले थायरॉइड का आकार और बनावट देखें। इसके बाद यह देखें कि रिपोर्ट में कोई गांठ, सिस्ट या दूसरी असामान्यता बताई गई है या नहीं। अगर गांठ मौजूद है, तो उसका आकार और स्थान देखें। रिपोर्ट में गांठ की बनावट, वह ठोस है या तरल से भरी है, उसकी चमक, आकार, किनारे और कैल्सिफिकेशन जैसी जानकारी भी दी जा सकती है।

कुछ रिपोर्टों में टीआई-रैड्स (TI-RADS) भी लिखा होता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसका उपयोग थायरॉइड की गांठों को उनकी अल्ट्रासाउंड तस्वीर के आधार पर अलग-अलग जोखिम श्रेणियों में रखने के लिए किया जाता है। इसमें गांठ की बनावट, चमक, आकार, किनारे और कुछ अन्य विशेषताओं को देखा जाता है। इसलिए अगर रिपोर्ट में टीआर-3, टीआर-4 या टीआर-5 लिखा है, तो केवल इस नंबर को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। गांठ का आकार और उसकी दूसरी विशेषताओं को देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि आगे क्या करना है।

क्या थायरॉइड अल्ट्रासाउंड से कैंसर का पता चलता है?

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड गांठ की ऐसी विशेषताओं को पहचानने में मदद कर सकता है जो आगे की जांच की जरूरत का संकेत दे सकती हैं। लेकिन केवल अल्ट्रासाउंड के आधार पर हर गांठ में कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती। अगर किसी गांठ में आगे जांच की जरूरत दिखाई देती है, तो डॉक्टर एफएनए बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। इसमें बहुत पतली सुई की मदद से गांठ से थोड़ा सा नमूना लिया जाता है और प्रयोगशाला में उसकी जांच की जाती है। इसलिए रिपोर्ट में गांठ मिलने पर तुरंत डरने के बजाय डॉक्टर से पूरी रिपोर्ट समझना जरूरी है।

क्या थायरॉइड अल्ट्रासाउंड से थायरॉइड की कार्यक्षमता पता चलती है?

नहीं। थायरॉइड अल्ट्रासाउंड मुख्य रूप से थायरॉइड की बनावट और उसमें मौजूद बदलावों को देखने के लिए किया जाता है। इससे यह पता नहीं चलता कि थायरॉइड सामान्य मात्रा में हार्मोन बना रहा है या कम या ज्यादा। थायरॉइड के कामकाज को जानने के लिए डॉक्टर टीएसएच, टी3, टी4 और जरूरत के अनुसार दूसरे रक्त परीक्षण करा सकते हैं। इसलिए थायरॉइड की पूरी स्थिति समझने के लिए अल्ट्रासाउंड और रक्त जांच को अलग-अलग जानकारी देने वाली जांचों के रूप में देखा जाता है।

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड के बाद कौन-सी जांच हो सकती है?

अगर अल्ट्रासाउंड में कोई गांठ या दूसरा बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर मरीज के लक्षण और दूसरी जांचों को देखकर आगे की जांच तय कर सकते हैं। कुछ मरीजों में टीएसएच, टी3, टी4 या थायरॉइड एंटीबॉडी की जांच की जा सकती है। अगर किसी गांठ की ज्यादा जांच जरूरी हो, तो अल्ट्रासाउंड की मदद से एफएनए बायोप्सी भी की जा सकती है। हर मरीज के लिए सभी जांचें जरूरी नहीं होतीं। आगे की जांच का निर्णय डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर लेते हैं।

क्या थायरॉइड अल्ट्रासाउंड सुरक्षित है?

हाँ, थायरॉइड अल्ट्रासाउंड सामान्यतः सुरक्षित जांच है। इसमें आयनकारी रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता और आमतौर पर इसमें सुई या इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती। जांच के दौरान केवल प्रोब का हल्का दबाव महसूस हो सकता है। सामान्य अल्ट्रासाउंड से किसी ज्ञात हानिकारक प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में थायरॉइड जांच

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के मार्गदर्शन में थायरॉइड और न्यूक्लियर मेडिसिन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं। थायरॉइड से जुड़ी समस्या में कौन-सी जांच आवश्यक है, यह मरीज के लक्षण, पहले की जांचों और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। इसलिए अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में कोई बदलाव आने पर उसे डॉक्टर से समझना जरूरी है।

निष्कर्ष

थायरॉइड अल्ट्रासाउंड एक आसान, सुरक्षित और बिना रेडिएशन वाली जांच है। इसकी मदद से थायरॉइड के आकार, बनावट और उसमें मौजूद गांठ या दूसरे बदलावों के बारे में जानकारी मिल सकती है। रिपोर्ट में नोड्यूल, उसका आकार, स्थान, बनावट और टीआई-रैड्स जैसी जानकारी दी जा सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में गांठ दिखाई देने का मतलब सीधे कैंसर नहीं होता। आगे की जांच की जरूरत है या नहीं, यह डॉक्टर पूरी रिपोर्ट और मरीज की स्थिति को देखकर तय करते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन और विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन में थायरॉइड से जुड़ी जांच और आवश्यक चिकित्सकीय मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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