थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। कई बार थायरॉइड में छोटी या बड़ी गांठ बन जाती है, जिसे थायरॉइड नोड्यूल कहा जाता है। ज्यादातर थायरॉइड नोड्यूल कैंसर वाले नहीं होते, लेकिन कुछ गांठों में कैंसर होने की संभावना हो सकती है। इसलिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड और FNAC बायोप्सी जैसी जांच की सलाह देते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के मार्गदर्शन में थायरॉइड से जुड़ी जांच और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। थायरॉइड की समस्या में कौन-सी जांच आवश्यक है, यह मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर तय किया जाता है।
FNAC बायोप्सी क्या होती है?
FNAC का पूरा नाम Fine Needle Aspiration Cytology है। इसे आम भाषा में बारीक सुई से गांठ से कोशिकाओं का नमूना लेने की जांच कहा जा सकता है। थायरॉइड में मौजूद गांठ के अंदर से बहुत पतली सुई की मदद से कुछ कोशिकाएं निकाली जाती हैं। इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में माइक्रोस्कोप के नीचे देखा जाता है। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि गांठ सामान्य यानी गैर-कैंसर वाली है, कैंसर की संभावना है या जांच के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। FNAC आमतौर पर एक छोटी प्रक्रिया होती है और इसमें बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। थायरॉइड की गांठ से नमूना लेते समय अल्ट्रासाउंड की मदद ली जा सकती है, जिससे सुई को गांठ के सही हिस्से तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
थायरॉइड नोड्यूल की जांच में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है?
थायरॉइड अल्ट्रासाउंड से गांठ का आकार, स्थान और उसकी बनावट देखे जाते हैं। डॉक्टर यह भी देखते हैं कि गांठ ठोस है या उसमें तरल है, उसके किनारे कैसे हैं और उसमें कैल्सिफिकेशन जैसी विशेषताएं मौजूद हैं या नहीं। कुछ गांठों में ऐसी अल्ट्रासाउंड विशेषताएं दिखाई दे सकती हैं जिनके कारण आगे FNAC कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, केवल अल्ट्रासाउंड देखकर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि कोई गांठ कैंसर वाली है या नहीं। जरूरत पड़ने पर कोशिकाओं की जांच के लिए FNAC की जाती है।
FNAC बायोप्सी कैसे होती है?
FNAC के दौरान मरीज को आमतौर पर पीठ के बल लिटाया जाता है और गर्दन को थोड़ा पीछे की ओर रखा जाता है। गांठ की सही जगह देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसके बाद गर्दन की त्वचा को साफ किया जाता है और बहुत पतली सुई को गांठ के अंदर डाला जाता है। सुई के माध्यम से गांठ से थोड़ी मात्रा में कोशिकाओं का नमूना लिया जाता है। जरूरत पड़ने पर पर्याप्त नमूना प्राप्त करने के लिए एक से अधिक बार नमूना लिया जा सकता है। प्रक्रिया के दौरान हल्का चुभन या दबाव महसूस हो सकता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया छोटी होती है और मरीज इसके बाद घर जा सकता है।
क्या FNAC के लिए खाली पेट रहना पड़ता है?
थायरॉइड की सामान्य FNAC के लिए आमतौर पर खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, अगर मरीज कोई खून पतला करने वाली दवा ले रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। कुछ दवाओं के बारे में डॉक्टर प्रक्रिया से पहले विशेष निर्देश दे सकते हैं। इसलिए अपनी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए।
FNAC रिपोर्ट से कैसे पता चलता है कि गांठ कैंसर वाली है या नहीं?
FNAC से निकाली गई कोशिकाओं को पैथोलॉजिस्ट माइक्रोस्कोप के नीचे देखते हैं। थायरॉइड की FNAC रिपोर्ट को समझने के लिए कई केंद्र Bethesda System का इस्तेमाल करते हैं। इसमें जांच के परिणामों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है। रिपोर्ट में Benign, Malignant, Suspicious for Malignancy,
AUS/FLUS, Follicular Neoplasm या Non-diagnostic जैसे शब्द दिखाई दे सकते हैं।
Benign
Benign का अर्थ है कि नमूने में कैंसर के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर अक्सर गांठ की निगरानी के लिए समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। हालांकि, सामान्य FNAC रिपोर्ट के बाद भी डॉक्टर मरीज की स्थिति और अल्ट्रासाउंड के अनुसार आगे की निगरानी तय करते हैं।
Malignant
Malignant का अर्थ है कि जांच में कैंसर की कोशिकाओं की विशेषताएं मिली हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आगे के इलाज के लिए विशेषज्ञ सलाह और आवश्यक जांच की योजना बनाते हैं। थायरॉइड की FNAC में पैपिलरी थायरॉइड कैंसर सबसे सामान्य प्रकारों में से एक है।
Suspicious for
Malignancy
इसका मतलब है कि कोशिकाओं में कुछ ऐसे बदलाव दिखाई दिए हैं जो कैंसर की ओर संकेत कर सकते हैं, लेकिन केवल इस नमूने के आधार पर कैंसर की पूरी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में डॉक्टर आगे की जांच या सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
AUS/FLUS
इसका अर्थ है कि नमूने में कुछ असामान्य कोशिकाएं दिखाई दी हैं, लेकिन यह तय करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है कि गांठ कैंसर वाली है या नहीं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर दोबारा FNAC, अतिरिक्त जांच, कुछ मामलों में आणविक जांच या अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
Follicular Neoplasm
इस श्रेणी में कोशिकाओं में ऐसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं जिनके आधार पर केवल FNAC से यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि गांठ कैंसर वाली है या गैर-कैंसर वाली। कुछ मामलों में आगे की जांच या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
Non-diagnostic
इसका मतलब है कि जांच के लिए लिया गया नमूना पर्याप्त नहीं था या उससे स्पष्ट निष्कर्ष निकालना संभव नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में डॉक्टर दोबारा FNAC या दूसरी उचित जांच की सलाह दे सकते हैं।
क्या हर थायरॉइड नोड्यूल की FNAC जरूरी होती है?
नहीं। हर थायरॉइड नोड्यूल में FNAC की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर गांठ का आकार, अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाली विशेषताएं, मरीज की उम्र, लक्षण और दूसरी चिकित्सकीय जानकारी को देखकर तय करते हैं कि FNAC की आवश्यकता है या नहीं। कुछ छोटी और कम जोखिम वाली गांठों में केवल नियमित अल्ट्रासाउंड से निगरानी की जा सकती है।
क्या FNAC के बाद भी कैंसर का पता लगाने के लिए दूसरी जांच की जरूरत पड़ सकती है?
कुछ मामलों में हां। अगर FNAC की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से सामान्य या कैंसर वाली न हो, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ संदिग्ध या अनिश्चित मामलों में दोबारा FNAC, आणविक जांच, नियमित अल्ट्रासाउंड या सर्जरी जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। खासकर कुछ प्रकार की गांठों में केवल कोशिकाओं को देखकर अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं होता। इसलिए FNAC रिपोर्ट को अकेले देखकर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति को साथ में देखना जरूरी है।
FNAC के बाद कितने समय में रिपोर्ट आती है?
FNAC की रिपोर्ट आने में जांच केंद्र और नमूने की जांच के तरीके के अनुसार अलग-अलग समय लग सकता है। आमतौर पर रिपोर्ट कुछ दिनों से लेकर लगभग दो सप्ताह तक में मिल सकती है। अगर अतिरिक्त जांच की जरूरत हो, तो परिणाम आने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
क्या FNAC बायोप्सी सुरक्षित है?
FNAC एक कम जोखिम वाली और कम चीरा लगाने वाली प्रक्रिया है। इसमें बहुत पतली सुई का इस्तेमाल किया जाता है और आमतौर पर किसी बड़े चीरे की जरूरत नहीं होती। अल्ट्रासाउंड की मदद से सुई को गांठ तक पहुंचाया जा सकता है। प्रक्रिया के बाद थोड़ी देर के लिए दर्द, हल्की सूजन या गर्दन में संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। अगर प्रक्रिया के बाद ज्यादा दर्द, लगातार सूजन या कोई असामान्य परेशानी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में थायरॉइड जांच
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के नेतृत्व में थायरॉइड और न्यूक्लियर मेडिसिन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं। संस्थान में अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी और अन्य जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। थायरॉइड में गांठ मिलने पर कौन-सी जांच जरूरी है, यह हर मरीज में अलग हो सकती है। इसलिए अल्ट्रासाउंड या FNAC की रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर से उसकी पूरी जानकारी समझना जरूरी है।
निष्कर्ष
थायरॉइड में गांठ मिलना हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होता। ज्यादातर थायरॉइड नोड्यूल कैंसर वाले नहीं होते, लेकिन कुछ गांठों में आगे की जांच की जरूरत हो सकती है। थायरॉइड अल्ट्रासाउंड गांठ की बनावट और दूसरी विशेषताओं को समझने में मदद करता है, जबकि FNAC बायोप्सी गांठ से कोशिकाओं का नमूना लेकर उन्हें माइक्रोस्कोप के नीचे जांचने में मदद करती है। FNAC की रिपोर्ट में Benign, Malignant,
Suspicious, AUS/FLUS और अन्य श्रेणियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में FNAC से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकलता और आगे की जांच की जरूरत पड़ सकती है।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन और विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन में थायरॉइड से जुड़ी जांच और चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हैं। सही जांच का चुनाव मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।