Anti-TPO थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट क्या होता है? Hashimoto’s Thyroiditis का पता कैसे चलता है?

Dr. Nikunj Jain
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Anti-TPO थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट क्या होता है? Hashimoto’s Thyroiditis का पता कैसे चलता है?

थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि है, लेकिन इसका असर शरीर के कई जरूरी कामों पर पड़ता है। थायरॉइड हार्मोन शरीर के ऊर्जा इस्तेमाल, दिल की धड़कन, वजन, पाचन और कई दूसरे कामों को प्रभावित करते हैं। जब थायरॉइड ठीक से काम नहीं करता, तो थकान, वजन में बदलाव, ठंड या गर्मी ज्यादा लगना, बाल झड़ना और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।

थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में Hashimoto’s Thyroiditis एक आम ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। समय के साथ इससे थायरॉइड कम सक्रिय हो सकता है और हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या हो सकती है। Hashimoto’s की जांच में Anti-TPO टेस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के नेतृत्व में थायरॉइड और न्यूक्लियर मेडिसिन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।

Anti-TPO टेस्ट क्या होता है?

Anti-TPO का पूरा नाम Anti-Thyroid Peroxidase Antibody है। यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसमें खून में थायरॉइड पेरोक्सीडेज एंटीबॉडी की मात्रा देखी जाती है। थायरॉइड पेरोक्सीडेज यानी TPO एक एंजाइम है, जो थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है। कुछ लोगों में इम्यून सिस्टम गलती से TPO के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने लगता है। इन्हें Anti-TPO एंटीबॉडी कहा जाता है। अगर Anti-TPO एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है, तो यह ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी की ओर इशारा कर सकता है। Hashimoto’s Thyroiditis में Anti-TPO एंटीबॉडी अक्सर पाई जाती हैं।

Hashimoto’s Thyroiditis क्या है?

Hashimoto’s Thyroiditis एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम थायरॉइड ग्रंथि को गलती से नुकसान पहुंचाने लगता है। समय के साथ थायरॉइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो सकती है। इसी वजह से Hashimoto’s अक्सर हाइपोथायरॉइडिज्म, यानी थायरॉइड के कम सक्रिय होने, का कारण बनता है। शुरुआत में कुछ लोगों को कोई खास लक्षण नहीं होते। जैसे-जैसे थायरॉइड हार्मोन कम होने लगते हैं, लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

Hashimoto’s के सामान्य लक्षण क्या हो सकते हैं?

Hashimoto’s में हर व्यक्ति के लक्षण एक जैसे नहीं होते। आम लक्षणों में लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, रूखी त्वचा, बाल झड़ना और मासिक धर्म में बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ लोगों में गर्दन के सामने थायरॉइड बढ़ने की वजह से सूजन या गले में भारीपन भी महसूस हो सकता है। कभी-कभी लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इसलिए व्यक्ति उन्हें सामान्य थकान या उम्र से जुड़ी परेशानी समझ सकता है। अगर ऐसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

Anti-TPO टेस्ट क्यों कराया जाता है?

Anti-TPO टेस्ट मुख्य रूप से यह समझने में मदद करता है कि थायरॉइड की समस्या के पीछे ऑटोइम्यून कारण हो सकता है या नहीं। अगर किसी व्यक्ति की TSH या T4 रिपोर्ट में बदलाव आया है और डॉक्टर को Hashimoto’s का संदेह है, तो वे Anti-TPO टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट Hashimoto’s जैसी ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी की पहचान में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को Anti-TPO टेस्ट की जरूरत नहीं होती। यह जांच डॉक्टर मरीज के लक्षणों और दूसरी रिपोर्टों को देखकर तय करते हैं।

Anti-TPO पॉजिटिव आने का क्या मतलब है?

अगर Anti-TPO टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो इसका मतलब है कि खून में TPO के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई हैं। यह Hashimoto’s Thyroiditis की संभावना को बढ़ा सकता है। लेकिन केवल Anti-TPO पॉजिटिव आने से यह नहीं कहा जा सकता कि व्यक्ति को निश्चित रूप से Hashimoto’s है या तुरंत इलाज की जरूरत है। डॉक्टर आमतौर पर TSH, Free T4, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर अन्य जांचों को साथ में देखते हैं। कुछ लोगों में Anti-TPO एंटीबॉडी पाई जा सकती हैं, लेकिन उस समय उनकी थायरॉइड कार्यक्षमता सामान्य हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर स्थिति के अनुसार आगे की निगरानी की सलाह दे सकते हैं।

Anti-TPO नेगेटिव आने पर क्या Hashimoto’s नहीं होता?

Anti-TPO नेगेटिव आने पर Hashimoto’s की संभावना कम हो सकती है, लेकिन केवल इस एक टेस्ट से बीमारी को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। NIDDK के अनुसार, अगर डॉक्टर को Hashimoto’s का संदेह हो लेकिन थायरॉइड एंटीबॉडी खून में न मिलें, तो कुछ मामलों में थायरॉइड अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रिपोर्ट को हमेशा डॉक्टर की सलाह और बाकी जांचों के साथ समझना चाहिए।

Hashimoto’s का पता कैसे चलता है?

Hashimoto’s की जांच केवल एक टेस्ट पर निर्भर नहीं करती। डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं और जरूरत पड़ने पर गर्दन में थायरॉइड की जांच करते हैं। इसके बाद कुछ ब्लड टेस्ट किए जा सकते हैं। इनमें TSH, Free T4 और Anti-TPO antibodies प्रमुख हैं। कुछ मामलों में Thyroglobulin Antibody यानी TgAb की जांच भी की जा सकती है। अगर रिपोर्ट और लक्षणों के आधार पर जरूरत हो, तो डॉक्टर थायरॉइड का अल्ट्रासाउंड भी लिख सकते हैं। अल्ट्रासाउंड से थायरॉइड की बनावट, आकार और कुछ अन्य बदलावों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

TSH और Anti-TPO टेस्ट में क्या अंतर है?

TSH टेस्ट यह समझने में मदद करता है कि थायरॉइड किस तरह काम कर रहा है, जबकि Anti-TPO टेस्ट यह देखने में मदद करता है कि थायरॉइड के खिलाफ ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया हो रही है या नहीं। उदाहरण के लिए, TSH बढ़ा हुआ आने पर डॉक्टर को हाइपोथायरॉइडिज्म का संदेह हो सकता है। अगर साथ में Anti-TPO भी पॉजिटिव है, तो इससे Hashimoto’s जैसे ऑटोइम्यून कारण की संभावना को समझने में मदद मिल सकती है। इसलिए दोनों टेस्ट अलग-अलग जानकारी देते हैं और कुछ मरीजों में इन्हें साथ में देखा जा सकता है।

क्या Anti-TPO टेस्ट के लिए खाली पेट रहना जरूरी है?

Anti-TPO एक सामान्य ब्लड टेस्ट है। आमतौर पर इस टेस्ट के लिए किसी खास तैयारी या खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। खून की थोड़ी मात्रा बांह की नस से ली जाती है। अगर Anti-TPO के साथ दूसरे ब्लड टेस्ट भी होने हैं, तो उन जांचों के लिए अलग तैयारी की जरूरत हो सकती है। इसलिए टेस्ट से पहले डॉक्टर या लैब से तैयारी के बारे में पूछ लेना बेहतर है। अगर आप पहले से थायरॉइड की दवा या कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इसकी जानकारी डॉक्टर या लैब को जरूर दें। अपनी दवा खुद से बंद नहीं करनी चाहिए।

Anti-TPO टेस्ट सुरक्षित है?

Anti-TPO एक सामान्य ब्लड टेस्ट है और इसमें बहुत कम जोखिम होता है। खून लेते समय सुई लगने से हल्की चुभन हो सकती है। कुछ लोगों को जांच वाली जगह पर हल्का दर्द या नीला निशान हो सकता है, जो आमतौर पर थोड़े समय में ठीक हो जाता है।

क्या Hashimoto’s का इलाज संभव है?

Hashimoto’s की वजह से अगर हाइपोथायरॉइडिज्म हो जाता है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार थायरॉइड हार्मोन की दवा दे सकते हैं। इलाज और दवा की मात्रा व्यक्ति की रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जाती है। इलाज शुरू होने के बाद भी डॉक्टर समय-समय पर TSH और जरूरत के अनुसार दूसरे थायरॉइड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं, ताकि यह देखा जा सके कि थायरॉइड हार्मोन का स्तर सही बना हुआ है या नहीं। दवा की मात्रा खुद से बढ़ाना, कम करना या बंद करना सही नहीं है।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में थायरॉइड जांच

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन, सह-संस्थापक और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख, के नेतृत्व में थायरॉइड से जुड़ी डायग्नोस्टिक और न्यूक्लियर मेडिसिन सेवाएं उपलब्ध हैं। डॉ. निकुंज जैन के पास न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

थायरॉइड से जुड़ी समस्या की जांच के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार TSH, T3, T4, Free T4 और Anti-TPO जैसी जांचों की जरूरत पड़ सकती है। हर मरीज के लिए सभी टेस्ट जरूरी नहीं होते। कौन-सी जांच करानी है, यह मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और पहले की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है। अगर आपको लंबे समय से थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, बाल झड़ना या थायरॉइड से जुड़े दूसरे लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना बेहतर है।

निष्कर्ष

Anti-TPO थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है, जो थायरॉइड के खिलाफ बनने वाली TPO एंटीबॉडी की जांच करता है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर Hashimoto’s Thyroiditis जैसी ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी के कारण को समझने में मदद के लिए किया जा सकता है। Hashimoto’s का पता केवल Anti-TPO टेस्ट से नहीं चलता। डॉक्टर आमतौर पर TSH, Free T4, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों को साथ में देखते हैं। कुछ मामलों में थायरॉइड अल्ट्रासाउंड की भी जरूरत पड़ सकती है।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में डॉ. निकुंज जैन और विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन में उपलब्ध डायग्नोस्टिक और न्यूक्लियर मेडिसिन सेवाओं के माध्यम से डॉक्टर की सलाह के अनुसार थायरॉइड से जुड़ी जांच और आगे का मूल्यांकन कराया जा सकता है।

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